वैश्विक संकटों के बीच भी मजबूत रहेगी भारत की अर्थव्यवस्था, UN रिपोर्ट में बड़ा दावा

India's Economy to Remain Resilient Amidst Global Crises: Major Claim in UN Report

नई दिल्ली: दुनिया भर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव—जैसे इजरायल-ईरान विवाद और रूस-यूक्रेन युद्ध—के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूती के साथ आगे बढ़ती नजर आ रही है। संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत 2026 और 2027 में भी दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रह सकता है।

2026-27 में मजबूत ग्रोथ का अनुमान
United Nations Economic and Social Commission for Asia and the Pacific (एस्कैप) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की आर्थिक वृद्धि दर 2026 में 6.4 प्रतिशत और 2027 में 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत स्थिर और मजबूत बनी हुई है।

2025 में शानदार प्रदर्शन, भारत का बड़ा योगदान
रिपोर्ट बताती है कि दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम एशिया की अर्थव्यवस्थाओं ने 2025 में 5.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जो 2024 के 5.2 प्रतिशत से अधिक है। इसमें भारत की भूमिका अहम रही। वर्ष 2025 में भारत की वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत तक पहुंची, जिसे मजबूत घरेलू मांग—खासकर ग्रामीण क्षेत्रों—और कर सुधारों का समर्थन मिला।

निर्यात पर दबाव, लेकिन सेवा क्षेत्र मजबूत
हालांकि, 2025 की दूसरी छमाही में आर्थिक गतिविधियों में कुछ नरमी देखी गई। संयुक्त राज्य अमेरिका की टैरिफ नीतियों के कारण भारत के निर्यात पर असर पड़ा और अमेरिका को होने वाले निर्यात में गिरावट दर्ज की गई। इसके बावजूद, सेवा क्षेत्र ने अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान की।

महंगाई रहेगी नियंत्रण में
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में मुद्रास्फीति दर 2026 में 4.4 प्रतिशत और 2027 में 4.3 प्रतिशत रहने की संभावना है, जो आर्थिक स्थिरता का संकेत है।

FDI में गिरावट, फिर भी भारत आकर्षण का केंद्र
वैश्विक व्यापार तनाव और अनिश्चितताओं के चलते एशिया-प्रशांत क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में गिरावट दर्ज की गई है। 2024 में हल्की बढ़त के बाद 2025 में इसमें कमी आई, जबकि वैश्विक स्तर पर निवेश प्रवाह बढ़ा। इसके बावजूद, ग्रीनफील्ड निवेश के लिए भारत प्रमुख गंतव्यों में शामिल रहा।

रेमिटेंस से मिल रहा सहारा
विदेशों में काम कर रहे एशियाई और प्रशांत क्षेत्र के श्रमिकों द्वारा भेजी जा रही धनराशि (रेमिटेंस) में लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे घरेलू अर्थव्यवस्थाओं को मजबूती मिल रही है।

निष्कर्ष
कुल मिलाकर, रिपोर्ट संकेत देती है कि वैश्विक संकटों और अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था स्थिरता बनाए रखते हुए निरंतर विकास की राह पर आगे बढ़ रही है।

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